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Ishwar Kya Hai

क्या आप ईश्वर के बारे में प्रचलित धारणाओं और विश्वासों से परे जाकर सत्य को जानना चाहते हैं? जे. कृष्णमूर्ति ... Show more
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ईश्वर क्या है? जे. कृष्णमूर्ति

क्या आप ईश्वर के बारे में प्रचलित धारणाओं और विश्वासों से परे जाकर सत्य को जानना चाहते हैं? जे. कृष्णमूर्ति की यह पुस्तक आपको पारंपरिक सोच और मान्यताओं से मुक्त होकर ईश्वर की प्रकृति को समझने का एक नया दृष्टिकोण देती है। वे कहते हैं कि “सत्य एक ‘मार्गरहित भूमि’ है” और यह किसी भी धर्म, दर्शन या संप्रदाय के माध्यम से नहीं पाया जा सकता है ।

इस ई-बुक में आप सीखेंगे:

  • सोचने की प्रक्रिया को समझना: यह पुस्तक बताती है कि ईश्वर की हमारी धारणाएँ हमारे अपने संस्कारों, मानसिक बनावट और भय का परिणाम होती हैं ।
  • विचार और सत्य के बीच का संबंध: कृष्णमूर्ति समझाते हैं कि विचार समय का हिस्सा है, और जो समय के परे है उसे जानने के लिए विचार का अंत होना आवश्यक है ।
  • अकेलेपन और डर का समाधान: जानें कि कैसे मनुष्य ने अपने अकेलेपन और निराशा के कारण एक विचार या छवि को पवित्रता दे दी है ।
  • विश्वास बनाम अन्वेषण: यह पुस्तक सिखाती है कि विश्वास या अविश्वास अन्वेषण में बाधा डालते हैं ।
  • मन की शांति और मौन: जानें कि मन कैसे शांत और मौन होता है जब वह अपनी पूर्ण अक्षमता को अज्ञात को जानने के लिए स्वीकार कर लेता है, और इसी मौन में सृजन होता है ।

यह ई-बुक आपको अपनी सोच की सीमाओं से परे जाने और आंतरिक सत्य को खोजने में मदद करेगी।

यह पुस्तक ईश्वर की परंपरागत धारणाओं से कैसे अलग है?
जे. कृष्णमूर्ति के अनुसार, ईश्वर की अवधारणाएँ हमारे विचारों, संस्कारों और अनुभवों का परिणाम हैं । वे सिखाते हैं कि सत्य एक "मार्गरहित भूमि" है और इसे किसी भी संगठित धर्म या संप्रदाय के माध्यम से नहीं पाया जा सकता ।
कृष्णमूर्ति के अनुसार ईश्वर को कैसे खोजा जा सकता है?
कृष्णमूर्ति के अनुसार, ईश्वर या यथार्थ को केवल तभी खोजा जा सकता है जब विचार का समापन हो जाता है । वे बताते हैं कि हमें विश्वास या अविश्वास की प्रक्रिया को छोड़कर विचार के समय में बांधने वाले लक्षण को समझना होगा
क्या यह पुस्तक किसी विशेष धर्म के बारे में है?
नहीं। कृष्णमूर्ति की शिक्षाएँ किसी भी विशेष धर्म से जुड़ी नहीं हैं । उनकी शिक्षाएँ केवल पूर्व या पश्चिम के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए हैं ।
इस ई-बुक का मुख्य संदेश क्या है?
इस पुस्तक का मुख्य संदेश यह है कि बाहरी और आंतरिक सुरक्षा की तलाश में हमारा मन एक भ्रम पैदा करता है । सत्य का अन्वेषण केवल वही मन कर सकता है जो सुरक्षित नहीं है और किसी भी अधिकारभाव से मुक्त है ।
क्या यह पुस्तक सिर्फ दार्शनिकों के लिए है?
नहीं। कृष्णमूर्ति ने समूह से नहीं, बल्कि सीधे व्यक्ति से बात की । उनकी शिक्षाओं का केंद्र यह बोध है कि समाज में कोई भी मूलभूत परिवर्तन केवल व्यक्तिगत चेतना के रूपांतरण से ही लाया जा सकता है ।

📢 नोटिस (Notice):

 

⚠️ यह ईबुक डाउनलोड के लिए नहीं है। इसे केवल उस प्लेटफ़ॉर्म पर पढ़ा जा सकता है जहाँ यह उपलब्ध है। अगर कोई चार्ज दिखाई दे रहा है, तो वह केवल प्लेटफ़ॉर्म सेवा शुल्क है, ईबुक के लिए कोई भुगतान नहीं है।